
छत्तीसगढ़ में आज इतिहास रच गया। लगभग 200 माओवादियों ने हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
लेकिन इस बार मामला सिर्फ़ सरेंडर का नहीं — बल्कि पुनर्वास का है।
सरकार ने साफ़ कहा है —

राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद प्रभावित इलाकों से आ रही आवाज़ें अब सरकार तक पहुँच रही हैं।
सरकार कुछ अहम बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है —
मूलवासी बचाओ मंच पर लगे प्रतिबंध की पुनर्समीक्षा होगी।
हथियार छोड़ने वालों के लिए DRG में भर्ती अब अनिवार्य नहीं होगी।
नक्सल गतिविधियों के आरोप में जेल में बंद लोगों की रिहाई और पुनर्वास पर विचार चल रहा है।
गृह मंत्री ने कहा —
“हिंसा से समाधान नहीं, संवाद से रास्ता निकलेगा। आज यह कदम उस भरोसे की जीत है जो हमने एक-दूसरे पर जताया है।”
छत्तीसगढ़ में शांति का नया अध्याय शुरू हो चुका है — जहां बंदूकें खामोश हैं, और भरोसे की आवाज़ बुलंद।
khojkhbarchhattisgarh hindi news