कलमकारों के सम्मान, सुरक्षा व सुविधाओं की मांग को लेकर देशभर के पत्रकार एकजुट

ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता रायपुर छत्तीसगढ़
रायपुर छत्तीसगढ़ तिल्दा-नेवरा: राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ ईकाई नई दिल्ली ने देशभर के पत्रकारों ने एक स्वर में घोषणा की है— “हम सबने ठाना है, 26 को दिल्ली जाना है… जंतर–मंतर से होगी गर्जना, चौथे स्तंभ का पूरा हो सपना।”
लोकतंत्र के सजग प्रहरी माने जाने वाले पत्रकार समुदाय ने इस बार अपने हक और सम्मान के लिए राजधानी दिल्ली में बड़ा आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया है।
आयोजकों के मुताबिक 26 तारीख को जंतर–मंतर पर विशाल एकत्रीकरण होगा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से पत्रकार, मीडिया कर्मी, स्वतंत्र पत्रकार, डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि और पत्रकार संगठन शामिल होंगे। आंदोलन का उद्देश्य पत्रकारों को “लोकतंत्र रक्षक” का दर्जा दिलाना और उन्हें संसद–विधानसभा सदस्यों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है।
पत्रकार बोले — “ना तोप, ना तलवार… ज़ुल्म मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो”
आंदोलनकारियों ने कहा कि पत्रकारिता ही वह शक्ति है जो बिना हथियार लोकतंत्र को सबसे मजबूत बनाती है।
“ना तोप ना तलवार, ना खंजर निकालो… ज़ुल्म मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो” जैसे नारों के साथ देशभर के पत्रकार संघर्ष की तैयारी में जुट चुके हैं। उनका कहना है कि कलम की धार से ही व्यवस्था (निज़ाम) चलती है और जब चौथा स्तंभ परेशान होता है, तो लोकतंत्र भी कमजोर होता है।
मुख्य मांगें
पत्रकारों को “लोकतंत्र रक्षक” का दर्जा दिया जाए।
सांसद–विधायक की तरह दवाई, पढ़ाई, यात्रा में रियायत मिले।
अवैतनिक (बिना मानदेय) वर्षों से सेवा दे रहे पत्रकारों को सम्मान व पहचान मिले।
मीडिया कर्मियों की सुरक्षा व प्रेस की स्वतंत्रता के लिए स्पष्ट और मजबूत कानून बने।
प्रदेशों व जिलों में प्रेस से जुड़े मामलों के लिए त्वरित सहायता तंत्र लागू हो।
जंतर–मंतर से उठेगी एकजुट आवाज़
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी दल या गुट के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे मीडिया जगत की सुरक्षा और सम्मान के लिए है।
आयोजकों ने अपील की है कि देशभर के पत्रकार एकजुट होकर जंतर–मंतर पहुंचें ताकि सरकार तक मजबूत संदेश जाए और चौथे स्तंभ को उसका हक मिल सके।
“चौथे स्तंभ को सम्मान दो, कलम को आवाज़ दो…
हम सब साथ हों, जंतर-मंतर से एक ही आवाज़ हो।”
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