
तिल्दा नेवरा (रायपुर)।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे तिल्दा ब्लॉक के ग्राम बेल्दारसिवनी में इन दिनों आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गांव में स्थित पूरे छत्तीसगढ़ में विख्यात प्राचीन स्वयंभू अर्धनारीश्वर शिवलिंग के नवनिर्मित मंदिर में तीन दिवसीय भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया है, जिससे समूचा क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर हो गया है।
बताया जाता है कि यह शिव मंदिर लगभग 200 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान स्वयंभू अर्धनारीश्वर शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यह शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था, जिसकी दिव्यता आज भी रहस्य बनी हुई है।
प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रतिदिन दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि उनकी आस्था इस शिवलिंग से इतनी गहराई से जुड़ी है कि अब इसे द्वादश ज्योतिर्लिंग के समान पूजने की परंपरा भी प्रचलित हो गई है।
मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन कुंड भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां भक्त पुण्य स्नान कर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से अभिषेक करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कुंड का जल और शिवलिंग दोनों ही चमत्कारी शक्तियों से युक्त हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस स्वयंभू शिवलिंग पर पूर्व में शोध भी किया गया, लेकिन आज तक कोई भी इसके रहस्य को पूरी तरह उजागर नहीं कर सका, जिससे इसकी दिव्यता और रहस्यमय स्वरूप और अधिक प्रबल हो गया है।
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के चलते बेल्दारसिवनी गांव पूरी तरह शिवमय वातावरण में डूबा हुआ है। यह प्राचीन शिवधाम न केवल क्षेत्रीय आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई दे रहा है।
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