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छत्तीसगढ़ पहुंचे भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, राजधानी में हुआ भव्य स्वागत

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रायपुर ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता संतोष कुमार यदु

रायपुर/तिल्दा नेवरा। छत्तीसगढ़ की धरती पर देश के न्यायिक इतिहास का अहम क्षण दर्ज हुआ, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत राजधानी रायपुर पहुंचे। उनके आगमन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत करते हुए पुष्पगुच्छ भेंट किया और राजकीय गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाने वाले विशेष स्मृति-चिह्न भी भेंट किए, जिनमें विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम और माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति शामिल रही। इन प्रतीकों के माध्यम से प्रदेश की लोक आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी रहे उपस्थित

इस गरिमामय अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नरसिम्हा एवं प्रशांत कुमार मिश्रा का भी स्वागत किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, न्यायिक अधिकारी एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

न्यायपालिका लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और उसके मार्गदर्शन में देश में कानून का शासन सुदृढ़ होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दौरे से राज्य की न्यायिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।

हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में करेंगे संबोधन

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे हैं। यह समारोह Hidayatullah National Law University के विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
दीक्षांत समारोह में वे छात्रों को संबोधित करेंगे और विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करेंगे।

न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा नया संबल

मुख्य न्यायाधीश के इस दौरे को प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था और विधि शिक्षा के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार ने उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की थीं और पूरा कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

छत्तीसगढ़ की न्यायिक और शैक्षणिक परंपरा के लिए यह दिन एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

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