
खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता
तिल्दा-नेवरा (रायपुर), 02 जून 2026।
ग्राम बहेसर एवं बरतोरी के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद पर्यावरण विभाग की टीम ने शौर्य इस्पात, बहेसर तथा आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने उद्योग प्रबंधन पर निजी एवं सरकारी भूमि पर औद्योगिक अपशिष्ट और प्लांट मैटेरियल की डंपिंग करने तथा पर्यावरण प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया है।
निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि कथित डंपिंग के कारण क्षेत्र में धूल (डस्ट) का स्तर बढ़ गया है, जिससे वायु प्रदूषण फैल रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि उड़ती धूल से कृषि भूमि एवं फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बरतोरी क्षेत्र की निजी एवं सरकारी भूमि पर बिना उचित अनुमति के औद्योगिक अपशिष्ट डंप किया जा रहा है। उन्होंने इसकी वैधता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पर्यावरण विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान डंपिंग स्थलों एवं प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन किया तथा ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा कर उनकी शिकायतों को दर्ज किया। अधिकारियों ने मौके से आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज भी एकत्रित किए।
अधिकारियों ने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लिया गया है। पर्यावरणीय नियमों एवं अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के किसी भी प्रकार के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और प्रथम दृष्टया प्राप्त तथ्यों के आधार पर संबंधित उद्योग प्रबंधन को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि कथित अवैध डंपिंग को तत्काल बंद कराया जाए, निजी एवं सरकारी भूमि पर किए गए डंपिंग की निष्पक्ष जांच हो, पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन किया जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी उद्योग का विरोध करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित कराना है। उन्होंने प्रशासन से पर्यावरण एवं राजस्व विभाग की संयुक्त जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो क्षेत्र के लोग लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अन्य जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित करने को बाध्य होंगे।
खोज खबर छत्तीसगढ़ से बातचीत में ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि पर्यावरण विभाग निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करेगा तथा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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