जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने तहसीलदार को सौंपा दावा-आपत्ति, 2.833 हेक्टेयर जमीन उद्योग को नहीं देने की मांग

तिल्दा नेवरा खोज खबर छत्तीसगढ़ न्यूज
तिल्दा-नेवरा। ग्राम ताराशिव की सरकारी जमीन को औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने इसका विरोध करते हुए तिल्दा-नेवरा तहसीलदार के समक्ष दावा-आपत्ति आवेदन प्रस्तुत किया है। संगठनों ने सरकारी जमीन को उद्योग के लिए आवंटित नहीं करने की मांग की है।
तहसीलदार को दिए गए आवेदन के अनुसार ग्राम ताराशिव, प.ह.नं. 14, तिल्दा तहसील में स्थित खसरा नंबर 658 की 2.371 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 659 के हिस्से की 0.462 हेक्टेयर, इस प्रकार कुल 2.833 हेक्टेयर सरकारी भूमि को औद्योगिक प्लॉट के लिए आवंटित किए जाने की प्रक्रिया का विरोध किया गया है।
“सरकारी जमीन उद्योग के लिए नहीं, ग्रामीणों के काम आए”
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारियों का कहना है कि उक्त भूमि का उपयोग स्थानीय लोग खेलकूद तथा मवेशियों के चराई के लिए करते हैं। यदि जमीन को औद्योगिक उपयोग के लिए दे दिया गया तो भविष्य में क्षेत्र में वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
संगठनों ने आवेदन में संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्थानीय उपयोग और ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए उक्त सरकारी भूमि का औद्योगिक आवंटन नहीं किया जाए।


प्रशासन के समक्ष रखा दावा-आपत्ति
दोनों संगठनों की ओर से दिए गए आवेदन में मुख्य महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, रायपुर द्वारा औद्योगिक प्लॉट के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई है।
संगठनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी जमीन का संरक्षण किया जाना जरूरी है। यदि ऐसी जमीन उद्योगों को दे दी जाएगी तो भविष्य में गांव के लोगों के लिए सार्वजनिक उपयोग की जमीन की कमी हो सकती है।
बिलाड़ी के बाद ताराशिव को लेकर बढ़ा विरोध
ताराशिव की जमीन को लेकर सामने आए इस विरोध ने क्षेत्र में सरकारी जमीन के औद्योगिक उपयोग को लेकर बहस तेज कर दी है। इससे पहले बिलाड़ी की सरकारी जमीन को लेकर भी विरोध के स्वर उठे थे। अब ताराशिव मामले में दावा-आपत्ति प्रस्तुत किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने स्पष्ट मांग की है कि ताराशिव की 2.833 हेक्टेयर सरकारी भूमि का औद्योगिक आवंटन रोका जाए और इसे स्थानीय ग्रामीणों के हित में सुरक्षित रखा जाए।
> मुख्य सवाल: जब सरकारी जमीन का उपयोग ग्रामीण खेलकूद, मवेशियों की चराई और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए हो रहा है, तो उसे औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित करने की जरूरत क्यों पड़ी?
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