
तिल्दा नेवरा खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर: पुलिस की मौजूदगी में नियमों की उड़ी धज्जियां, भैरवगढ़ धाम (तिल्दा नेवरा) में रात 11 बजे तक बजता रहा डीजे; सवाल पूछने पर TI ने साधी चुप्पी
विशेष संवाददाता, रायपुर
तिल्दा नेवरा, 05 सितंबर 2026: उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी किए गए सख्त आदेशों की तिल्दा नेवरा क्षेत्र में सरेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। ताजा मामला आज दिनांक 05 सितंबर 2026 को तिल्दा नेवरा के वार्ड नंबर 3 स्थित भैरवगढ़ धाम से सामने आया है, जहाँ नियमों को दरकिनार कर देर रात तक तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर का संचालन किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह प्रशासनिक उल्लंघन किसी गुपचुप तरीके से नहीं, बल्कि स्थानीय थाना पुलिस बल की प्रत्यक्ष मौजूदगी में हुआ।
रात 11:00 बजे तक गूंजता रहा लाउडस्पीकर
मिली जानकारी के अनुसार, आज शनिवार की रात भैरवगढ़ धाम परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कानूनन प्रतिबंधित समय बीत जाने के बाद भी लाउडस्पीकर बजता रहा। रात 10:40 बजे से लेकर मध्य रात्रि 11:00 बजे तक तेज आवाज में डीजे का संचालन किया गया। नियमानुसार रात 10:00 बजे के बाद किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रख दिया गया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में वार्डवासी उपस्थित थे और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भारी पुलिस बल भी वहां मुस्तैद था।
पत्रकारों के सवाल पर थाना प्रभारी ने साधी चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जब मौके पर मौजूद पत्रकारों ने कानून और नियमों का उल्लंघन होते देख वहां तैनात थाना प्रभारी (TI) से इस संबंध में सवाल पूछा, तो उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया। पुलिस अधिकारी द्वारा इस संवेदनशील मामले पर चुप्पी साध लेने और कोई कार्रवाई न करने से स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ जहां रायपुर पुलिस सोशल मीडिया और विज्ञापनों के माध्यम से रात 10 बजे के बाद डीजे पर तत्काल सख्त कार्रवाई का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर तिल्दा नेवरा पुलिस की उपस्थिति में ही नियमों का उल्लंघन होता रहा।
वार्डवासियों में असमंजस, उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद ?
भैरवगढ़ धाम के आस-पास रहने वाले नागरिकों का कहना है कि देर रात तक चले इस शोरगुल के कारण बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब कानून का पालन कराने वाली पुलिस ही मूकदर्शक बन जाए, तो आम जनता न्याय के लिए किसके पास जाए? इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद अब देखना होगा कि जिला पुलिस अधीक्षक (SP) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस लापरवाही को लेकर दोषी पुलिसकर्मियों और नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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