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साईं धाम रोड के औद्योगिक परिसर निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

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पंचायत की जमीन पर निर्माण को लेकर स्वामित्व, राशि, अनुमति और भविष्य के आवंटन की प्रक्रिया पर मांगा गया जवाब

तिल्दा नेवरा खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता

तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत तुलसी में साईं धाम रोड स्थित खसरा क्रमांक 469/1 पर इन दिनों निर्माण कार्य चल रहा है। ग्राम पंचायत के सरपंच के अनुसार यहां औद्योगिक परिसर का निर्माण पंचायत द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि, निर्माणाधीन परिसर और भविष्य में दुकानों अथवा इकाइयों के आवंटन को लेकर अब कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है, उसका वास्तविक स्वामित्व किसके नाम दर्ज है और क्या उक्त भूमि विधिवत ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में निहित है? इसके साथ ही निर्माण के लिए स्वीकृत राशि, राशि का स्रोत, निर्माण की अनुमति और निर्माण पूर्ण होने के बाद परिसर के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

इसी खसरा नंबर पर पहले हो चुका है निर्माण ध्वस्त

स्थानीय लोगों के अनुसार इसी खसरा क्रमांक 469/1 पर कुछ वर्ष पूर्व एक व्यक्ति द्वारा दुकान का निर्माण कराया जा रहा था। उस समय उक्त निर्माण को शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए शासन द्वारा कार्रवाई कर निर्माण को तोड़े जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब उसी खसरा नंबर पर पंचायत द्वारा निर्माण कराए जाने को लेकर भूमि की प्रकृति और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।

पंचायत की संपत्ति के आवंटन पर कानूनी प्रक्रिया अहम

जानकारों के अनुसार यदि उक्त भूमि ग्राम पंचायत की संपत्ति है और उस पर दुकान अथवा औद्योगिक परिसर का निर्माण किया जा रहा है, तो निर्माण के बाद उसका आवंटन निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाना आवश्यक होगा। पंचायत की अचल संपत्ति के विक्रय, पट्टे अथवा अन्य प्रकार के हस्तांतरण में संबंधित कानून और नियमों का पालन महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 65 तथा छत्तीसगढ़ पंचायत (अचल संपत्ति का अंतरण) नियम, 1994 में पंचायत की अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। ऐसे मामलों में सार्वजनिक नीलामी तथा सक्षम स्वीकृति जैसे प्रावधानों का पालन किया जाना महत्वपूर्ण माना जाता है।

केवल पंचायत प्रस्ताव से आवंटन संभव है या नहीं?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तुलसी ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन इस औद्योगिक परिसर की दुकानों अथवा इकाइयों का आवंटन किस आधार पर किया जाएगा?

क्या इसके लिए सार्वजनिक नीलामी कराई जाएगी?
क्या ई-टेंडर अथवा कोई अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
या फिर किसी व्यक्ति अथवा संस्था को सीधे आवंटन किया जाएगा?

यदि बिना सार्वजनिक नीलामी के आवंटन किया जाना है, तो इसके लिए सक्षम अधिकारी अथवा शासन से आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं—यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

‘पंचायत के पास ऐसा कौन सा खजाना?’—मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि जब ग्राम पंचायत क्षेत्र में आज भी सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं, तो इतनी बड़ी राशि से औद्योगिक परिसर निर्माण की प्राथमिकता क्यों तय की गई?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, किस योजना अथवा मद से राशि मिली और पंचायत की वित्तीय स्थिति क्या है, इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?

सरपंच से जानकारी लेने पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला

निर्माण और आवंटन प्रक्रिया को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया। सरपंच ने बताया कि औद्योगिक परिसर का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि निर्माण पूरा होने के बाद परिसर अथवा दुकानों का आवंटन किस आधार पर किया जाएगा, तो इस संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। सरपंच ने कहा कि वे बाहर जा रहे हैं और वापस आने के बाद फोन करने की बात कहते हुए बातचीत समाप्त कर दी।

इन सवालों के जवाब जरूरी

खसरा क्रमांक 469/1 की भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम दर्ज है?

क्या उक्त भूमि विधिवत ग्राम पंचायत के नाम अथवा पंचायत में निहित है?

भूमि का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है?

औद्योगिक परिसर निर्माण के लिए किस विभाग से अनुमति ली गई है?

पंचायत की बैठक में निर्माण का प्रस्ताव कब पारित किया गया?

निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?

राशि किस योजना अथवा मद से खर्च की जा रही है?

निर्माण कार्य किस एजेंसी/ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है?

निर्माण के बाद दुकानों या औद्योगिक इकाइयों का आवंटन किस नियम के तहत होगा?

क्या आवंटन के लिए सार्वजनिक नीलामी कराई जाएगी?

यदि बिना नीलामी आवंटन प्रस्तावित है, तो क्या सक्षम अधिकारी या शासन की पूर्व स्वीकृति ली गई है?

क्या भूमि और पंचायत की संपत्ति से संबंधित सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है?


दस्तावेज सामने आने से साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल निर्माण कार्य जारी है, लेकिन भूमि स्वामित्व, निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्रोत और भविष्य के आवंटन की प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्राम पंचायत को चाहिए कि वह खसरा रिकॉर्ड, पंचायत प्रस्ताव, निर्माण स्वीकृति, स्वीकृत राशि, कार्यादेश तथा भविष्य के आवंटन से संबंधित नियमों की जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि पंचायत की संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका दूर हो सके।

अब देखना होगा कि तुलसी ग्राम पंचायत इन सवालों और दस्तावेजों को सार्वजनिक कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करती है या नहीं।

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