
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव श्याम नंदन कुमार यादव ने आज प्रेस को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने श्री केपी यादव द्वारा मीडिया के माध्यम से प्रसारित की गई जानकारी को पूरी तरह से भ्रामक, निराधार और समाज को गुमराह करने वाला बताया।
प्रमुख बिंदु:
1. जिस संस्था की ओर से श्री केपी यादव ने बयान जारी किया है, वह संस्था माननीय न्यायालय द्वारा अमान्य घोषित की जा चुकी है।
2. तमिलनाडु उच्च न्यायालय ने स्वप्न घोष के नेतृत्व वाले उस संगठन को साक्ष्य के अभाव में अवैध माना है।
3. उक्त मामले में न्यायालय ने संस्था के द्वितीय पक्ष, जिसमें माननीय जस्टिस श्री रविन्द्र यादव अध्यक्ष हैं, को मान्यता प्रदान की है।
4. संगठन का लोगो और रजिस्ट्रेशन न्यायालय द्वारा जब्त कर लिया गया है।
5. श्री केपी यादव को प्रधान महासचिव कहना भी भ्रामक है, क्योंकि उनका इस संस्था से कोई वैधानिक संबंध नहीं है।
6. मधुबनी जिले में जो कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, वह “श्री कृष्णा यादव महासभा” के तत्वावधान में हो रहा है – जिसका श्री केपी यादव द्वारा उल्लेखित संस्था से कोई लेना-देना नहीं है।
7. इस अमान्य संस्था के कई राष्ट्रीय पदाधिकारियों पर न्यायालय में मुकदमे लंबित हैं।

श्री श्याम नंदन कुमार यादव ने जोर देते हुए कहा,
> “ऐसी झूठी जानकारियों के जरिए समाज को भ्रमित किया जा रहा है। जनता से अनुरोध है कि वे सिर्फ न्यायालय से मान्यता प्राप्त संस्था की बातों पर ही विश्वास करें।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्री केपी यादव द्वारा प्रेस के माध्यम से जो बातें कही गई हैं, उनका कोई कानूनी या सामाजिक औचित्य नहीं है, और मधुबनी जिला प्रशासन का भी उस संस्था से कोई संबंध नहीं है।
जारीकर्ता:
श्याम नंदन कुमार यादव
पूर्व राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा

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