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खोज खबर छत्तीसगढ़ | विशेष रिपोर्टमिलिए ओडिशा की पहली महिला चित्रकार – श्रीमती बसंत कुमारी सामंत से

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खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता संतोष कुमार यदु

भुवनेश्वर ओडिशा : भारतीय स्वतंत्रता के दस साल बाद जब ओडिशा में पहला ललित कला संस्थान “गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स” खलीकोट में स्थापित हुआ, उस दौर में लड़कियों का घर की चौखट पार कर किसी पेशेवर करियर की ओर देखना भी कठिन था। ऐसे समय में कला की दुनिया में एक साहसी कदम रखते हुए बसंत कुमारी सामंत ने न केवल एक कलाकार, बल्कि लेखिका के रूप में भी अपनी खास पहचान बनाई।

ओडिशा की प्रथम महिला चित्रकार
1957 में खलीकोट के कला और शिल्प महाविद्यालय में दाखिला लेकर वे वहाँ की पहली महिला छात्रा बनीं। 1961 में उन्होंने तेल चित्रकला में डिप्लोमा प्राप्त किया और इसके साथ ही वह ओडिशा की पहली महिला चित्रकार बन गईं। वर्षों की साधना और समर्पण ने उन्हें उस मुकाम पर पहुँचाया जहाँ उनकी कला ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई।

युवाओं के लिए आवाज़ उठाई
श्रीमती सामंत मानती हैं कि युवाओं में कला को लेकर उत्साह है, लेकिन अवसरों की भारी कमी है। उनका कहना है कि ललित कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार को स्कूलों-कॉलेजों में कला शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए। साथ ही, कला शिक्षकों को स्थायी और सम्मानजनक वेतन देकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

कई माध्यमों में पारंगत कलाकार
कला के विभिन्न रूपों—जलरंग, रेखाचित्र, तेल चित्रकला आदि—में सामंत की दक्षता बेमिसाल है। उन्होंने बताया कि शरत चंद्र देव, जीत चरण मोहंती, अजीत केशरी रे और रबी नारायण नायक जैसे वरिष्ठ कलाकारों से उन्हें गहन प्रेरणा मिली, जिन्होंने न केवल कला रची बल्कि ओडिशा के इतिहास को चित्रित किया।

सम्मान और पुरस्कारों की लंबी सूची
अपने लम्बे करियर में उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया, जिनमें शामिल हैं:

विशेष उपाधियाँ:

असिमा – टाटा स्टील

कला गौरव – गंजम जिला प्रेस क्लब

वाटर कलर मास्टर – ONGC व IPCA

माटी पर गर्व – ओडिशा ललित कला

आजीवन समर्पण – ओडिशा ललित कला

बहुमुखी प्रतिभा – OTDC

गांधी गौरव – अनाया उत्कल


प्रमुख कलात्मक पुरस्कार:

राष्ट्रीय ललित कला अकादमी

SCERT, EZCC, NCERT

ओडिशा ललित कला पाइका विद्रोह

कोणार्क नाट्य मंडप

निर्भया

चलापथ लेखक संगठन

टाटा स्टील, नोडल हाई स्कूल

GCAC सहपति संजोगा – 1986


परिवार बना प्रेरणा स्रोत
श्रीमती सामंत बताती हैं कि उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनके माता-पिता ने घूंघट की परंपरा के बीच भी उन्हें कला कॉलेज भेजने का सपना देखा और साकार किया। वे मानती हैं कि शिक्षा, साहित्य और ललित कला में रुचि रखने वालों के लिए “शिक्षण” सबसे उत्कृष्ट पेशा है।

खोज खबर की विशेष प्रस्तुति
ओडिशा की इस महान कलाकार का जीवन एक मिसाल है उन सभी युवतियों के लिए जो सामाजिक बंधनों को तोड़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। उनकी कहानी इस बात की गवाही है कि अगर परिवार साथ दे और समाज अवसर दे, तो महिलाएं हर क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं।

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