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ख़बर का असर: खरोरा बस स्टैंड का कायाकल्प

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खोज ख़बर छत्तीसगढ़ की रिपोर्टिंग से हरकत में आया प्रशासन

ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता

खरोरा, 21 सितम्बर।
खोज ख़बर छत्तीसगढ़ द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे और माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर के निर्देशों के बाद आखिरकार खरोरा नगर पंचायत और जिला प्रशासन हरकत में आया। शहीद खिलानंद साहू बस स्टैंड, जो अब तक अव्यवस्था और बदहाली का प्रतीक बना हुआ था, अब पूरी तरह बदला-बदला नजर आ रहा है।

सिर्फ 24 घंटे के भीतर प्रशासन ने कई सुधारात्मक कदम उठाए। बस स्टैंड परिसर में नई लाइट व्यवस्था, यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल की सुविधा, नियमित सफाई व्यवस्था, कचरा निस्तारण के लिए विशेष इंतज़ाम और बैठने की उचित व्यवस्था की गई। गड्ढों को बजरी डालकर समतल किया गया और पूरे परिसर की मरम्मत व रंगाई-पुताई कर आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया।

प्रस्ताव और सौंदर्यीकरण की योजना

11 अगस्त 2025 को नगर पंचायत परिषद खरोरा की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि बस स्टैंड का सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है और शासन की स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ होगा। साथ ही, बस स्टैंड स्थान में शहीद खिलानंद की मूर्ति स्थापना का कार्य भी शुरू हो चुका है।

जनता का दबाव और पत्रकारिता का असर

यह बदलाव आसान नहीं था। स्थानीय पत्रकारों ने लगातार इस उपेक्षा पर नगर पंचायत प्रशासन को घेरा। खोज ख़बर छत्तीसगढ़ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। यह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए शर्मनाक है कि हाईकोर्ट को उनकी जिम्मेदारी याद दिलानी पड़ी, जबकि यह जनता का अधिकार है कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलें।

आगे की चुनौती

फिलहाल बस स्टैंड का कायाकल्प हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि –
क्या नगर पंचायत प्रशासन आगे भी इस व्यवस्था को नियमित रूप से बनाए रखेगा, या फिर जनता को एक बार फिर हाईकोर्ट के हंटर का इंतजार करना पड़ेगा?

बस स्टैंड के बगल का गार्डन आज भी बदहाल है। अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत अपनी जिम्मेदारियां समय पर निभाती है या फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाती है।

👉 यह कदम यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ शहीद के सम्मान को अक्षुण्ण रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

1 अगस्त 2025 को नगर पंचायत परिषद खरोरा की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि बस स्टैंड का सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है और शासन की स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ होगा। साथ ही, बस स्थानक में शहीद खिलानंद की मूर्ति स्थापना का कार्य भी शुरू हो चुका है।

जनता का दबाव और पत्रकारिता का असर

यह बदलाव आसान नहीं था। स्थानीय पत्रकारों ने लगातार इस उपेक्षा पर नगर पंचायत प्रशासन को घेरा। खोज ख़बर छत्तीसगढ़ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। यह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए शर्मनाक है कि हाईकोर्ट को उनकी जिम्मेदारी याद दिलानी पड़ी, जबकि यह जनता का अधिकार है कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलें।

आगे की चुनौती

फिलहाल बस स्टैंड का कायाकल्प हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि –
क्या नगर पंचायत प्रशासन आगे भी इस व्यवस्था को नियमित रूप से बनाए रखेगा, या फिर जनता को एक बार फिर हाईकोर्ट के हंटर का इंतजार करना पड़ेगा?

बस स्टैंड के बगल का गार्डन आज भी बदहाल है। अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत अपनी जिम्मेदारियां समय पर निभाती है या फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाती है।

👉 यह कदम यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ शहीद के सम्मान को अक्षुण्ण रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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