
ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता सुरजपुर
सूरजपुर दोहरा हत्याकांड, बलरामपुर कस्टोडियल डेथ, रायपुर में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएँ, पैर पसारते आर्थिक अपराधियों का विकराल साम्राज्य, बदहाल सड़कें और ध्वस्त प्रशासनिक व्यवस्था — यानी वर्तमान भाजपा सरकार पूरी तरह असफल सिद्ध हो रही है।
यह लेख असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी के फेसबुक वाल से ली गई है, इनके द्वारा राजनीति, अपराध, विधि व समाज के अन्य विषयों पर शोधात्मक लेख व वीडियो बनाकर जागरूकता लातें हैं।
अम्बिकापुर – जब से भाजपा की सरकार आई है और विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री बने हैं, तब से कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ती गई है। अगर भाजपा की आलोचना करते हैं तो कांग्रेस की याद आती है।
तब हमारे सरगुजा ने कांग्रेस को 14 सीटें दी थीं, फिर 2023 में भाजपा को। पिछली कांग्रेस सरकार के शुरुआती दो वर्ष ठीक-ठाक चले, लेकिन ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनने की लड़ाई ने सरगुजा को गर्त में ढकेल दिया। इस संभाग को पिछली सरकार से एक ढेला नहीं मिला।
नतीजा—जनता ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर भाजपा की सरकार बनाई। बदले में भाजपा ने सरगुजा संभाग के लगभग प्रत्येक क्षेत्र से एक कैबिनेट मंत्री और यही से मुख्यमंत्री दिया, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
माना जा रहा है कि जिस तरह अमित शाह गुजरात को अपने चरण पादुका से चलाते हैं, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ को प्रशासनिक अधिकारी चला रहे हैं। विष्णुदेव साय कहने को मुख्यमंत्री हैं, लेकिन शक्ति ओ.पी. चौधरी और राज्य गृह मंत्री विजय शर्मा में भी बँटी हुई है।

जहाँ तक पिछली कांग्रेस सरकार की बात है — हमने भूपेश बघेल सरकार की मुखर आलोचना की, जिसकी हमें सज़ा भी मिली।
हमारे से जुड़े पत्रकार साथियों पर 11 फर्जी FIR हुए, उन्हें तड़ीपार किया गया।
फ़र्जी मुकदमों से बचने के लिए मुझे खुद माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।
फिर भी उस सरकार में एक बात थी—बड़े अपराधियों पर कार्रवाई होती थी, भू-माफ़िया जेल जाते थे, और अगर आप पत्र लिखते थे तो उसका जवाब आता था।
लॉ एंड ऑर्डर पर सरकार थोड़ी गंभीर दिखती थी।
भूपेश बघेल के नेतृत्व में दम था, अधिकारियों में मुख्यमंत्री का ख़ौफ़ था। विवादित कलेक्टर और एसपी का रातोरात ट्रांसफ़र हो जाता था।
मुख्यमंत्री सहित वर्तमान प्रदेश भाजपा सरकार के किसी मंत्री में नेतृत्व क्षमता वाली कोई बात अगर आपको प्रभावित करती हो तो बताइए?
प्रशासनिक भर्राशाही, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही — कम से कम सरगुजा में तो चरम पर है।
प्रदेश से लेकर देश तक किसी भी स्थापित मीडिया में यदि आपने सत्ता पक्ष की तीखी आलोचना पढ़ी या सुनी हो तो बताइए?
प्रसिद्ध अख़बारों या चैनलों में पुलिस विभाग के विषय में कभी आलोचना देखी-सुनी हो तो मेरी जानकारी बढ़ाइए।
🔴 सरकार फेल।
🔴 जनप्रतिनिधि कमजोर।
🔴 प्रशासनिक मनमानी।
🔴 मीडिया सत्ता की चाटुकारिता।
🔴 रसूख़दारों के विरुद्ध खबर दबाने की पहचान।
और युवाओं का मुख्य मुद्दा है—“एल्विश यादव का शो होगा कि नहीं?”
वर्तमान सरकार अभी से ही बर्दाश्त से बाहर है।
और अगर अगले चुनाव में कांग्रेस की सोचें तो टी.एस. सिंहदेव के ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनने की ज़िद्द याद आती है।
आख़िर हम करें तो करें क्या?
जाएँ तो जाएँ कहाँ? ❓
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