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ब्रह्माकुमारीज तिल्दा में महिलाओं ने जाना सात्विक रसोई का महत्व

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परिवार को सशक्त और सुखी बनाने का केंद्र है रसोई

तिल्दा नेवरा खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता

तिल्दा, 30 मार्च।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर तिल्दा स्थित ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में रविवार शाम “सात्विक रसोई : सुखी परिवार” विषय पर एक प्रेरणादायी आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को बताया गया कि घर की रसोई केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य, संस्कार और खुशहाली का आधार है।

कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि भोजन बनाते समय मन की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शांत, प्रसन्न और सकारात्मक भाव से बनाया गया भोजन परिवार के सदस्यों के मन और व्यवहार पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

कार्यक्रम की शुरुआत बहन राधा वर्मा द्वारा प्रस्तुत आध्यात्मिक गीत से हुई, जिसमें उन्होंने परमात्मा से जुड़कर चिंता मुक्त जीवन जीने का संदेश दिया। इसके बाद बालिका रुचिका ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावमय बना दिया। महिलाओं की टीम द्वारा प्रस्तुत नाटक ने दर्शाया कि अशांत मन से बनाया गया भोजन घर के वातावरण को प्रभावित करता है, जबकि प्रेम और शांति से बनाया गया भोजन रिश्तों में मिठास लाता है।

मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रकला वर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योति वाधवा तथा पार्षद एवं भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष रानी जैन की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।

अपने उद्बोधन में बीके प्रियंका ने कहा कि रसोई केवल स्वाद का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने आयुर्वेद के तीन दोष—जाती दोष, आश्रय दोष और निमित्त दोष—की जानकारी देते हुए बताया कि गलत खान-पान से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने महिलाओं को भोजन बनाने से पहले कुछ समय ध्यान (मेडिटेशन) करने की सलाह दी।

डॉ. ज्योति वाधवा ने सात्विक भोजन की महत्ता बताते हुए कहा कि यदि लोग ऐसे आध्यात्मिक केंद्रों से जुड़कर संतुलित भोजन और शांत मन अपनाएं, तो बीमारियां काफी हद तक कम हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि हमारा पाचन तंत्र भी “दूसरा मस्तिष्क” की तरह कार्य करता है, इसलिए भोजन और मन का गहरा संबंध है।

रानी जैन ने ब्रह्माकुमारीज की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम महिलाओं को उनकी वास्तविक शक्ति का एहसास कराता है। वहीं, चंद्रकला वर्मा ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली में भी महिलाओं को सकारात्मक मन से भोजन बनाने की आदत विकसित करनी चाहिए, जिससे परिवार का वातावरण बेहतर बन सके।

कार्यक्रम के अंत में प्रियंका दीदी ने सकारात्मक भावनाओं के साथ भोजन बनाने की विधि का अनुभव कराया और जानकारी दी कि 30 मार्च से सेवाकेंद्र में निःशुल्क शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे तथा शाम 7 से 8 बजे तक चलेगा।

(संपर्क: 9406009446)

👉 इस प्रकार यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए न केवल प्रेरणादायी रहा, बल्कि परिवार को सुखी और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी दे गया।

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