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“गरीब का हक छीना तो बर्दाश्त नहीं अब जाग रहा है गांव” 

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राशन, रोजगार और योजनाओं में गड़बड़ी से त्रस्त ग्रामीण, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तय

विशेष जनहित मे संपादकीय लेख

तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में इन दिनों एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है —
क्या गरीबों का हक सिर्फ कागजों में ही रह गया है?

ग्राम पंचायत सिलपटी सहित कई गांवों से यह शिकायत सामने आ रही है कि
महीनों से राशन नहीं मिला,
मनरेगा में काम नहीं मिल रहा,
और जो योजनाएं सरकार गरीबों के लिए चला रही है,
उनका लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच रहा।

गरीब मजदूर, जो रोज कमाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं,
आज वे ही सबसे ज्यादा परेशान हैं।
जब राशन नहीं मिलता, काम नहीं मिलता —
तो उनके सामने भूख और बेबसी के अलावा कुछ नहीं बचता।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि —
👉 क्या जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति से अनजान हैं?
👉 या फिर जानबूझकर आंखें बंद कर ली गई हैं?

ग्रामीणों का साफ कहना है कि
अगर समय पर राशन और योजनाओं का लाभ नहीं मिला,
तो वे अब चुप नहीं बैठेंगे।

यह सिर्फ एक गांव की नहीं, पूरे सिस्टम की समस्या है।
जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी,
तब तक गरीबों का हक यूं ही लुटता रहेगा।

जनता की मांग

सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो
दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो गरीबों को तुरंत उनका हक दिलाया जाए
राशन और रोजगार की व्यवस्था पारदर्शी बने

अंतिम संदेश

“गरीब की थाली खाली रही तो सत्ता की कुर्सी भी खाली हो सकती है।”

अब समय आ गया है कि
👉 जनता जागे
👉 प्रशासन जवाब दे
👉 और गरीब को उसका हक मिले


✍️ (संतोष कुमार यदु)
संपादक – खोज खबर छत्तीसगढ़ कलम से आयेगी क्रांति


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