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गोस्वामी तुलसीदास: लोकमानस के रामकवि  तुलसीदास जयंती –

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✍️ संपादक – संतोष कुमार यदु
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रायपुर छत्तीसगढ़ : 31 जुलाई को सम्पूर्ण भारतवर्ष में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। तुलसीदास जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति के अमर पुजारी, भक्ति आंदोलन के अगुआ और रामभक्ति की परंपरा के अद्वितीय प्रतिनिधि हैं। उनकी कालजयी रचना “श्रीरामचरितमानस” केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की आत्मा है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म संवत 1554 (ई.स. 1497) में उत्तर प्रदेश के राजापुर (चित्रकूट) में हुआ माना जाता है। माता हुलसी और पिता आत्माराम दुबे के पुत्र तुलसीदास का जीवन प्रारंभ से ही संघर्षमय रहा। बाल्यकाल में माता-पिता का स्नेह छिन गया, लेकिन उनका आत्मबल और श्रीराम में अगाध आस्था उन्हें एक अलौकिक साधक और काव्य शिरोमणि के रूप में स्थापित कर गई।

श्रीरामचरितमानस: जनभाषा में धर्म का दर्शन

तुलसीदास जी ने संस्कृत की कठिनता से हटकर लोकभाषा अवधी में “श्रीरामचरितमानस” की रचना की। यह कार्य उस समय के लिए क्रांतिकारी था, जब धार्मिक ग्रंथों तक आमजन की पहुंच सीमित थी। मानस के माध्यम से उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया।

“रामचरितमानस” केवल एक काव्य नहीं, बल्कि वह सेतु है, जो धर्म, नीति, आदर्श और आस्था को जोड़ता है।

मानवता, भक्ति और समाज सुधारक दृष्टिकोण

तुलसीदास केवल धार्मिक कवि नहीं थे, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उनके काव्य में समाज के हर वर्ग के लिए संदेश है – नारी की मर्यादा, राजा की नीति, प्रजा की भक्ति, संतों का महत्व और जीवन के प्रत्येक आयाम में धर्म का स्थान।

उनकी रचनाओं – विनयपत्रिका, दोहावली, कवितावली, रामलला नहछू, जानकीमंगल, आदि में जीवन की सरलता, आस्था की गहराई और भक्ति का उत्साह मिलता है।

तुलसीदास जी की प्रासंगिकता आज भी

आज जब समाज में मूल्य विघटन, सांस्कृतिक संक्रमण और मानसिक अशांति फैली है, तब तुलसीदास जी की वाणी और श्रीरामचरितमानस मार्गदर्शक बन सकती है। उनकी पंक्तियां आज भी प्रेरणा देती हैं:

> “बड़े भाग मानुष तनु पावा,
सुर दुर्लभ सदग्रंथन गावा।”

निष्कर्ष

गोस्वामी तुलसीदास जी भारतीय संस्कृति के सूर्य हैं, जिनकी किरणें आज भी घर-घर में राम नाम की जोत जलाए हुए हैं। उनकी जयंती पर हम सभी का कर्तव्य है कि हम उनके बताए हुए धर्म, भक्ति, करुणा और मर्यादा के मार्ग को आत्मसात करें।

🙏 तुलसीदास जयंती पर कोटिशः नमन।

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