
ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ़ संवाददाता संतोष कुमार यदु
तिल्दा नेवरा (रायपुर):
तिल्दा नेवरा ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर लखना इन दिनों विवादों में घिर गया है। सावन मास के अवसर पर जहां हज़ारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु पदयात्रा करते हुए जल चढ़ाने आते हैं, वहीं अब मंदिर में वीआईपी पास के नाम पर दर्शन में भेदभाव शुरू कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रशासन द्वारा ₹100 शुल्क लेकर वीआईपी पास जारी किया जा रहा है, जिससे संपन्न वर्ग के लोग सीधे अलग द्वार से दर्शन कर रहे हैं। जबकि आम श्रद्धालुओं को लंबी कतार में लगकर अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ रहा है।
इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था का विरोध करते हुए क्रांति सेना ने मंदिर प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताई है और थाना प्रभारी तिल्दा नेवरा को ज्ञापन सौंपकर उचित कार्यवाही की मांग की है।
समाजसेवियों का विरोध
स्थानीय समाजसेवियों और संस्थाओं ने इस व्यवस्था को धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए कहा कि —
> “सोमनाथ मंदिर में राजा हो या रंक, भगवान के सामने सब एक समान हैं। लालच में आकर पुजारियों द्वारा की जा रही यह व्यवस्था निंदनीय है। मंदिर में भेदभाव पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।”
संतों की प्रतिक्रिया
एक संत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
> “रुपयों के बल पर भगवान के दर्शन करना भक्ति नहीं, माया है। जब सम्मान पैसे देखकर किया जाए तो वह सम्मान नहीं, अपमान है। ऐसे दर्शन सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं।”
बिहारी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग
इस दौरान मंदिर परिसर में सेवा में लगे बिहारी मूल के एक व्यक्ति द्वारा श्रद्धालुओं से अभद्र भाषा का प्रयोग भी सामने आया है, जिसे लेकर क्रांति सेना ने सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने पुलिस से उक्त व्यक्ति पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन मौन
फिलहाल मंदिर प्रशासन और संबंधित विभाग इस पूरे मामले पर मौन है। लेकिन सावन जैसे पवित्र माह में दर्शनार्थियों के साथ हो रहे इस भेदभावपूर्ण व्यवहार ने आस्था को आहत किया है और अब इस मुद्दे ने सामाजिक रंग ले लिया है।
khojkhbarchhattisgarh hindi news