तिल्दा-नेवरा नगरपालिका की लापरवाही जनता तरहीं तरहीं ?
गाँधी वार्ड क्रमांक 09 का मामला सामने आया है

ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता तिल्दा-नेवरा संतोष कुमार यदु
तिल्दा-नेवरा “स्वच्छ भारत” का नारा गूंज रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट नज़र आती है। तिल्दा-नेवरा नगरपालिका के गाँधी वार्ड क्रमांक 09 में स्थित सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद पड़ा है। मजबूरन वार्डवासी खुले में शौच करने को विवश हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बार-बार नगरपालिका, वार्ड प्रतिनिधियों से लेकर जननिवारण पोर्टल 1100 तक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन नतीजा वही— “ढाक के तीन पात”।
अधूरे और ताले में जकड़े शौचालय
कोटा रोड, पीतांबरा फूड के पास बना शौचालय पिछले 11 साल से अधूरा पड़ा हुआ है। ठेकेदार काम बीच में छोड़कर चला गया और अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि आंख मूंदकर बैठे हैं।
नारायण धीरे के घर के पीछे, वार्ड 09 की बस्ती में स्थित शौचालय पिछले एक महीने से ताले में जकड़ा हुआ है। मानो कोई ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित की जा रही हो।
जनता की मजबूरी और सवाल
वार्डवासी खुले में, सड़कों किनारे शौच करने को मजबूर हैं। कभी नगरपालिका ने खुले में शौच करने पर जुर्माना लगाने के बोर्ड लगाए थे, लेकिन अब जब सार्वजनिक शौचालय ही बंद पड़े हैं, तो सवाल उठता है कि दंड किस पर लगना चाहिए— जनता पर या नगरपालिका पर?
वार्डवासियों का आक्रोश
निवासियों का आरोप है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल अपनी सुविधाओं और निधियों पर ध्यान दे रहे हैं। जनता की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं।
लोगों का कहना है कि यह स्थिति कहीं “अंधेर नगरी चौपट राजा” वाली कहावत को चरितार्थ तो नहीं कर रही?
बड़ा सवाल
क्या “स्वच्छ भारत अभियान” केवल नारों और कागज़ी कार्यवाहियों तक ही सीमित रह गया है? और क्या तिल्दा-नेवरा नगर पालिका जिम्मेदारी से आंखें मूंदे रहेगी, जबकि जनता रोज़ाना परेशानियों का सामना कर रही है?

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