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अल्ट्राटेक सीमेंट बैकुंठ में मजदूरों का आंदोलन 21वें दिन पर, प्रशासन समय रहते ले संज्ञान — नरेंद्र मोदी विचार मंच छत्तीसगढ़

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ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता तिल्दा-नेवरा

तिल्दा-नेवरा (छत्तीसगढ़):
राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र, बैकुंठ में मजदूरों का आंदोलन लगातार 21वें दिन भी जारी है। मजदूर अपने चार सूत्रीय मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।
शासन-प्रशासन की चुप्पी से नाराज मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 4 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो छत्तीसगढ़ के सभी अल्ट्राटेक संयंत्रों के सामने विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
✊ आंदोलन को मिला संगठनों का समर्थन
मजदूरों के समर्थन में आज राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम एवं नरेंद्र मोदी विचार मंच छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि दल ने बैकुंठ धरना स्थल पहुंचकर आंदोलनरत मजदूरों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
इस अवसर पर मंच के प्रदेश महासचिव दास जी साहू, रायपुर जिला की वरिष्ठ जिला अध्यक्ष श्रीमती पुनम देवांगन, जिला अध्यक्ष श्रीमती आशा देवी साहू, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष श्रीमती अंजलि आलोक दुबे, तहसील अध्यक्ष मोहन साहू (तिल्दा-नेवरा), गोविंद राम कुंवर (तहसील महामंत्री), पूर्व सरपंच जुड़ावन साहू, तहसील उपाध्यक्ष पं. संतोष कुमार जोशी, ग्राम अध्यक्ष दारा जोशी, जिला महामंत्री एवं पूर्व सरपंच तखत राम साहू, जिला अध्यक्ष बलौदाबाजार गोपी साहू, प्रदेश मीडिया प्रभारी किशोर साहू, प्रदेश महामंत्री दुर्गेश देवांगन, सिद्धिनाथ देवांगन, प्रदेश प्रवक्ता संगीता मिश्रा, प्रदेश महामंत्री महेश वाधवानी, महिला मोर्चा तहसील अध्यक्ष अनिता वर्मा, सुहेला तहसील अध्यक्ष कुंज राम यदु, शहर अध्यक्ष भावेश कुमार साहू, मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार यादव, तहसील उपाध्यक्ष हेमलाल वर्मा, जिला उपाध्यक्ष मिनेश नायक, पूर्व सरपंच अरविंद नायक, तथा राजेश्वरी सिवारे सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रतिनिधियों ने संयंत्र प्रबंधन की नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मजदूरों के साथ अन्याय असहनीय है।
⚠️ “समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदार प्रशासन होगा”
मंच के प्रदेश महासचिव दास जी साहू ने कहा —
“यदि प्रशासन ने समय रहते पहल नहीं की और संयंत्र प्रबंधन पर कार्यवाही नहीं की, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
वहीं आंदोलनरत मजदूर नेता पवन ठाकुर और कमलेश वर्मा ने कहा कि —
“यदि हमारी चार सूत्रीय मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलनरत मजदूर मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करने के लिए बाध्य होंगे।”
📜 मजदूरों की प्रमुख मांगें
ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी नियुक्ति दी जाए।
मजदूरी दरों में समानता और बढ़ोतरी की जाए।
सुरक्षा उपकरण एवं चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित हों।
श्रमिक कल्याण योजनाओं का सही क्रियान्वयन किया जाए।

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