Breaking News

तिल्दा रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, 50 साल पुराने रहवासियों के विस्थापन की आशंका

Khojkhbarchhattisgarh.com
समाचार में AI  से लिए गए तशविर एआई के मदद उपयोग किया गया है

ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता तिल्दा-नेवरा

रायपुर जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले तिल्दा विकासखंड के तिल्दा-नेवरा शहर के जोता रेलवे फाटक (एल.सी. नं. 398) पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व पार्षद जितेन्द्र कुमार सेन ने शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उक्त स्थल पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध ही नहीं है, इसके बावजूद बिना स्थल निरीक्षण के कार्यवाही आगे बढ़ाई जा रही है।
पत्र में उल्लेख है कि वर्ष 2025-26 की योजना के अंतर्गत लगभग 10 किमी लंबे बायपास निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्थल का दोबारा सर्वे या निरीक्षण नहीं किया गया, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
1150 मीटर के भीतर पहले से मौजूद रेलवे ओवरब्रिज
दस्तावेज़ों के अनुसार एल.सी. नं. 398 से मात्र 1150 मीटर की दूरी पर पहले से एक रेलवे ओवरब्रिज कार्यशील है। वहीं देशभर में रेलवे मानकों के अनुसार 1150 मीटर के भीतर दूसरा आरओबी आवश्यक नहीं होता, जिसकी पुष्टि रेलवे मंत्रालय से प्राप्त जानकारी से होती है।

नगरपालिका का प्रस्ताव: भारी वाहनों पर समयबद्ध प्रतिबंध
नगरपालिका परिषद तिल्दा-नेवरा की बैठक (07 अक्टूबर 2025) में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि यातायात जाम की समस्या से राहत मिल सके।

65 करोड़ रुपये की संभावित बचत
पूर्व पार्षद सेन ने सुझाव दिया है कि यदि रेलवे ओवरब्रिज के बजाय अंडरब्रिज का निर्माण किया जाए, तो शासन को लगभग 65 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इस राशि का उपयोग बायपास निर्माण में किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि एल.सी. 397 और 401 पर आरओबी का कार्य पहले से ही लगभग पूर्ण अवस्था में है।
50 वर्षों से बसे परिवार होंगे प्रभावित ।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि एल.सी. 398 पर आरओबी का निर्माण किया गया तो वार्ड क्रमांक 18, 16 और 19 के वे सैकड़ों नागरिक प्रभावित होंगे, जो पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से वहां निवासरत हैं। इससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और सामाजिक तनाव की स्थिति बन सकती है।
उच्चाधिकारियों से स्थल निरीक्षण की मांग

पूर्व पार्षद ने मांग की है कि उच्चाधिकारियों की समिति गठित कर स्थल का भौतिक निरीक्षण कराया जाए और जनहित को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाए। बिना पर्याप्त भूमि और जनसहमति के ओवरब्रिज निर्माण को जनविरोधी करार दिया गया है।

About Santosh Kumar

Check Also

चितावर धाम में साहू समाज का भव्य पदभार ग्रहण समारोह, एकता और संगठन का दिखा दम

Khojkhbarchhattisgarh.com सिमगा ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता संतोष कुमार यदु सिमगा 9 फरवरी ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ …