
ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता तिल्दा-नेवरा
तिल्दा-नेवरा
जोता रोड रेलवे फाटक पर प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण अब स्थानीय नागरिकों के लिए विकास नहीं, बल्कि विस्थापन और शोषण का प्रतीक बनता जा रहा है। मुआवज़ा और वैकल्पिक भूमि की मांग को लेकर वार्डवासियों में भारी आक्रोश है। वर्षों से शासन-प्रशासन के दरवाज़े खटखटाने के बावजूद गरीब मजदूरों और छोटे दुकानदारों की कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे मजबूर होकर अब प्रभावित परिवारों ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय लिया है।
प्रभावित वार्डवासियों ने बताया कि जोता रोड रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज एवं अंडरब्रिज निर्माण के कारण वार्ड क्रमांक 18, 19 एवं 16 के दर्जनों परिवारों के मकान, दुकानें और रोज़गार छिनने की कगार पर हैं। इनमें अधिकांश लोग पिछले 45–50 वर्षों से निवासरत हैं। बावजूद इसके, न तो समुचित मुआवज़ा तय किया गया और न ही वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई गई।
प्रभावितों का आरोप है कि शासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से ओवरब्रिज निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन उसी बजट से बायपास मार्ग बनाकर समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है। इसके लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
इस संबंध में वार्डवासियों ने नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन और दस्तावेज़ सौंप दिए हैं, फिर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार उपेक्षा से नाराज़ नागरिकों ने अब आंदोलन का रास्ता चुना है।
15 दिसंबर को खुबचंद बघेल चौक में आंदोलन
प्रभावित वार्डवासियों ने ऐलान किया है कि 15 दिसंबर 2025 को तिल्दा-नेवरा के खुबचंद बघेल चौक में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन के दौरान शासन-प्रशासन से मुआवज़ा, वैकल्पिक भूमि और मानवीय पुनर्वास की मांग दोहराई जाएगी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि इसके बाद भी न्याय नहीं मिला, तो वे मजबूरी में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
गरीब मजदूर और छोटे व्यापारी आज खुद को “राजा हरिश्चंद्र जैसी दानवीर मजबूरी” में खड़ा महसूस कर रहे हैं—सब कुछ लुटाने के बाद भी न्याय के लिए संघर्षरत।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन समय रहते समाधान निकालता है या आंदोलन और कानूनी लड़ाई इस मुद्दे को और बड़ा रूप देगी।
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