चौथे दिन भी नहीं पहुंचे कंपनी प्रबंधन,अधिकारी, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

तिल्दा-नेवरा : रायखेड़ा
अदानी पावर लिमिटेड एंड स्टील प्लांट रायखेड़ा में 16 सूत्रीय मांगों को लेकर करीब 1600 मजदूरों का धरना–प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी है, लेकिन अब तक कंपनी प्रबंधन का एक भी अधिकारी मजदूरों से बातचीत के लिए नहीं पहुंचा है। न ही शासन–प्रशासन के किसी अधिकारी ने संघर्षरत श्रमिकों की सुध ली है। स्थिति यह है कि मजदूर यूनियनें अब उग्र आंदोलन की तैयारी में हैं, और श्रमिकों का कहना है कि “अगर उनकी जायज़ मांगों पर तुरंत सुनवाई नहीं हुई, तो कठोर कदम उठाने पर वे मजबूर होंगे।”

मजदूरों के इस संघर्ष को आज क्षेत्र की पूर्व विधायक धरसीवा से अनीता शर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर पूर्ण समर्थन दिया। साथ ही डॉ. तेजराम पाल, पूर्व तीन बार सरपंच रहे आडसेना पंचायत प्रतिनिधि, और रायखेड़ा के सरपंच दिनेश वर्मा , जनपद सदस्य प्रकाश सगरवांशी भी मौके पर पहुंचे।
इन जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और आने वाले समय में अगर आंदोलन उग्र होता है तो वे भी साथ खड़े रहेंगे
श्रम विभाग के तय दर से कम भुगतान का आरोप
धरने पर बैठे श्रमिकों ने बताया कि उनकी 16 सूत्रीय मांगों में मुख्यतः श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी, कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, और बदहाल व्यवस्था को सुधारने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पहले भी दे चुकी है कंपनी आश्वासन, लेकिन हालात जस के तस
यह पहला मौका नहीं है जब रायखेड़ा प्लांट के मजदूर हड़ताल पर बैठे हों।
मजदूरों ने बताया कि 9 महीने पहले भी हड़ताल हुई थी, जिसमें कंपनी प्रबंधन ने बातचीत और समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन उस समय मजदूरों पर फर्जी केस दर्ज करा दिया गया, जो आज भी न्यायालय में लंबित हैं।

मजदूरों के साथ इलाके के किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों और बोरवेल में रिस रहा है, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ रहा है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
कड़ाके की ठंड में भी 1600 मजदूर तीन शिफ्ट में डटे
दिसंबर की ठिठुरन भरी ठंड के बावजूद 1600 मजदूर तीनों शिफ्टों में रात–दिन डटे हुए हैं। श्रमिकों का कहना है कि “हमारी मांगें न तो अवैध हैं, न असंभव। हम सिर्फ अधिकार चाहते हैं।”

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर कब कंपनी प्रबंधन और प्रशासन मजदूरों की समस्याओं पर गंभीरता दिखाता है।
अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो रायखेड़ा में यह आंदोलन बड़े रूप में सामने आ सकता है।
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