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अल्ट्राटेक सीमेंट बैकुंठ में 33वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 56 प्रशिक्षार्थियों को मिला नया जीवन-पथ

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ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता तिल्दा-नेवरा

तिल्दा-नेवरा। 7 जनवरी
अल्ट्राटेक कम्युनिटी वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, बैकुंठ में 33वां दीक्षांत समारोह उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह में 56 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण पत्र, मार्कशीट एवं 2000 रुपये की छात्रवृत्ति का चेक अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अल्ट्राटेक बैकुंठ के टेक्निकल हेड श्री राजीव सिंघल रहे। विशिष्ट अतिथियों में सिक्योरिटी एवं एडमिन हेड श्री अभिषेक तिवातिया, एबीपीएस स्कूल की प्राचार्य श्रीमती संगीता क्रिस्टोफर, सीजी बोर्ड स्कूल के प्राचार्य श्री अवधेश पांडे, ग्राम पंचायत कुंदरू के सरपंच श्री यशवंत वर्मा, बहेसर सरपंच प्रतिनिधि श्री सेवक राम बर्मन एवं टंडवा सरपंच प्रतिनिधि श्री कृष्ण कुमार वर्मा शामिल रहे।

1992 से युवाओं के भविष्य की नींव

यह व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र वर्ष 1992 से संचालित है। अब तक 33 बैच पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 34वां बैच वर्तमान में जारी है। अभी तक कुल 2083 युवाओं को यहां से प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है। यह केंद्र विशेष रूप से उन युवाओं के लिए स्थापित किया गया है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

अतिथियों ने दिया प्रेरक संदेश

मुख्य अतिथि श्री राजीव सिंघल ने अपने उद्बोधन में युवाओं से अपनी क्षमताओं को पहचानने और कौशल को ही अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया।
प्राचार्य श्रीमती संगीता क्रिस्टोफर एवं श्री अवधेश पांडे ने स्किल डेवलपमेंट को निरंतर आगे बढ़ाने और रोजगार से जोड़ने पर बल दिया।
सरपंच यशवंत वर्मा ने युवाओं को नशे से दूर रहकर सकारात्मक जीवन अपनाने की सलाह दी।

CSR टीम ने संभाली कमान

कार्यक्रम का संचालन सीएसआर अधिकारी श्रीमती सोनाली द्वारा किया गया। आयोजन की सफल व्यवस्था में सीएसआर टीम के दीपेंद्र कुमार मिश्रा, सीडी लहरे, मुन्नालाल बर्मन, श्रीमती निरुपमा कश्यप एवं सुश्री खुशबू धुरंधर का सराहनीय योगदान रहा। समारोह में संस्था के अधिकारी-कर्मचारी, प्रशिक्षक, वर्तमान एवं भूतपूर्व प्रशिक्षार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

2047 के विकसित भारत की ओर मजबूत कदम

इस दीक्षांत समारोह का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कौशलयुक्त बनाकर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत नींव रखना रहा। यह पहल देश में कुशल और आत्मनिर्भर कार्यबल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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