पंचायत अधिकारों की अनदेखी पर उठे सवाल
औद्योगिक विकास की आड़ में गांव की जमीन पर नजर?
ग्राम पंचायत सांकरा ने औद्योगिक क्षेत्र की शासकीय भूमि के बिना अनुमति हस्तांतरण पर कड़ा ऐतराज जताया है।
तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया पर रोक की मांग।
पंचायत ने कहा—गांव की जमीन पर फैसला गांव का होगा!

तिल्दा–नेवरा : औद्योगिक विकास की आड़ में शासकीय भूमि के कथित हेरफेर पर ग्राम पंचायत सांकरा ने बड़ा कदम उठाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना किसी भी तरह का भूमि हस्तांतरण या आबंटन पूरी तरह अवैध है। पंचायत ने इस संबंध में तहसीलदार तिल्दा–नेवरा, जिला रायपुर को लिखित ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
मामला तिल्दा–नेवरा विकासखंड के औद्योगिक क्षेत्र उद्योग भवन, रिंग रोड क्रमांक-01, तिल्दा–रायपुर से जुड़ा है, जहां खसरा नंबर 114, 118, 119/2, 120 एवं 121 की शासकीय भूमि के हस्तांतरण/आबंटन की तैयारी की आशंका जताई गई है। पंचायत का कहना है कि इन जमीनों के लिए ग्राम पंचायत से कोई अनुमति नहीं ली गई, जो कि पंचायती अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
ग्राम पंचायत ने बताया कि 05 जनवरी 2026 को आयोजित पंचायत बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि उक्त शासकीय भूमि का कोई भी हस्तांतरण या आबंटन पंचायत की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। पंचायत ने स्पष्ट किया कि यह भूमि गांव की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पंचायत ने प्रशासन को आगाह किया है कि यदि बिना अनुमति भूमि हस्तांतरण किया गया तो इससे ग्राम संसाधनों को भारी क्षति पहुंचेगी और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था कमजोर होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायत ने मांग की है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई या प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
इस मुद्दे ने एक बार फिर औद्योगिक विकास बनाम ग्राम स्वशासन की बहस को तेज कर दिया है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह पंचायत के कड़े रुख पर क्या कदम उठाता है।
इस दौरान महेंद्र साहू (सभापति प्रतिनिधि, जिला पंचायत), पूर्णिमा पाटिल (सरपंच), चांदनी यदु (जनपद सदस्य), एवन पाटिल (सरपंच प्रतिनिधि), शत्रुहन यदु (जनपद प्रतिनिधि) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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