चौथी सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस किंगमेकर, नवीन पटनायक के फैसले पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली / भुवनेश्वर।
ओडिशा में 2 अप्रैल को होने वाले राज्यसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। चार सीटों के रिक्त होने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा और बीजू जनता दल (बीजद) के बीच जटिल राजनीतिक गणित के बीच चौथी सीट सबसे बड़ी पहेली बनकर उभरी है।
वर्तमान में ओडिशा से राज्यसभा में बीजद के 7 और भाजपा के 3 सांसद हैं। 2 अप्रैल को भाजपा सांसद सुजीत कुमार व ममता मोहंता तथा बीजद सांसद मुजिबुल्ला खान और निरंजन बिसी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे चार सीटें खाली होंगी।
तीन सीटें लगभग तय, चौथी पर घमासान
विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के अनुसार भाजपा दो और बीजद एक सीट जीतने की स्थिति में हैं। चौथी सीट के लिए कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 30 मत आवश्यक हैं। भाजपा के पास 79 विधायक हैं, साथ ही तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है। दूसरी ओर, दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद की संख्या 48 रह गई है। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि माकपा का एक विधायक है।
तीन सुनिश्चित सीटों के बाद भाजपा के पास लगभग 22 अतिरिक्त वोट और बीजद के पास 18 वोट बचते हैं। चौथी सीट जीतने के लिए भाजपा को कम से कम 8 और बीजद को 12 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में कांग्रेस और माकपा के कुल 15 विधायक इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं।
भाजपा-बीजद समझौते की अटकलें, कांग्रेस की भूमिका अहम
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस द्वारा भाजपा-बीजद के कथित अंदरूनी समझौते के आरोपों के बावजूद इस बार बीजद को कांग्रेस का समर्थन मिलना आसान नहीं है। वहीं भाजपा के लिए भी बीजद का साथ पाकर तीसरी सीट जीतना सरल नहीं दिख रहा। हालांकि ‘राज्य हित’ के नाम पर किसी रणनीतिक सहमति की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डॉ. पबित्र मोहन सामंतराय बने चर्चा का केंद्र

इन्हीं राजनीतिक समीकरणों के बीच ओडिशा और राष्ट्रीय मीडिया में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पबित्र मोहन सामंतराय।
डॉ. सामंतराय ओड़िया दैनिक पर्यवेक्षक और अंग्रेज़ी दैनिक द कलिंग क्रॉनिकल समूह के प्रधान संपादक हैं। वे राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ (RPM), नेशनल मीडिया कन्फेडरेशन (NMC) और इंडियन फेडरेशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूज़पेपर्स (IFSMN), नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
मीडिया जगत में एक सशक्त राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकार और कल्याण से जुड़े मुद्दों को लगातार मजबूती से उठाया है, जिससे केंद्र सरकार का ध्यान कई बार नीतिगत सुधारों की ओर गया है।
वैदिक, योग और शिक्षा क्षेत्र में चार दशक का योगदान
डॉ. सामंतराय वैदिक इंटरनेशनल फाउंडेशन और महर्षि इंटरनेशनल ज्ञान फाउंडेशन के अध्यक्ष भी हैं। बीते चार दशकों से वे वैदिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति, योग और ध्यान के वैश्विक प्रचार में सक्रिय हैं। उनके प्रयासों से ओडिशा सहित देशभर में कई स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, वैदिक विज्ञान विद्यापीठ, योग-ध्यान और आयुर्वेद केंद्र स्थापित हुए हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में वे भाजपा प्रत्याशी के रूप में बड़चना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस दल के टिकट पर राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार उनकी उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है।
नवीन पटनायक के फैसले पर सबकी नजर
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, सभी की निगाहें बीजद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि उनका निर्णय न केवल चौथी सीट बल्कि ओडिशा के उच्च सदन में भावी राजनीतिक संतुलन की दिशा भी तय करेगा।

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