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ऑपरेशन निश्चय : नशे के नेटवर्क पर रायपुर ग्रामीण पुलिस का करारा वार

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73 किलो गांजा, लाखों की संपत्ति के साथ महिला तस्कर गिरफ्तार

लेकिन सवाल अब भी कायम—तिल्दा-नेवरा के “बड़े मगरमच्छ” कब पकड़ में आएंगे?

रायपुर तिल्दा-नेवरा ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता

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रायपुर 30 जनवरी
नशे के खिलाफ छेड़ी गई जंग में रायपुर ग्रामीण पुलिस ने एक और बड़ी कामयाबी दर्ज की है। विशेष अभियान “ऑपरेशन निश्चय” के तहत थाना तिल्दा-नेवरा पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी में संलिप्त एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर नशे के बदलते अपराधी पैटर्न पर सटीक प्रहार किया है।

पुलिस ने आरोपी महिला के कब्जे से 73 किलोग्राम गांजा, 790 नग प्रतिबंधित नाइट्रोसन टेबलेट, 03 बटनदार चाकू, ₹1,87,000 नगद, 06 मोबाइल फोन एवं 01 टैब जब्त किया है। जब्त मशरूका की कुल अनुमानित कीमत ₹41.75 लाख बताई जा रही है।

गिरफ्तार महिला आरोपी मधु मिश्रा (30 वर्ष) पति परस मिश्रा, निवासी वार्ड क्रमांक-22, अटल निवास सासाहोली, थाना तिल्दा-नेवरा के विरुद्ध अपराध क्रमांक 41/26, धारा 20(बी), 22(सी) एनडीपीएस एक्ट एवं 25 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गुप्त चैम्बर में छुपा था नशे का जखीरा

दिनांक 28 जनवरी 2026 को मिली पुख्ता सूचना के आधार पर नगर पुलिस अधीक्षक विधानसभा वीरेंद्र चतुर्वेदी के निर्देशन एवं थाना प्रभारी निरीक्षक रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वार्ड-22 स्थित अटल निवास में दबिश दी।
तलाशी के दौरान मकान में बनाए गए विशेष गुप्त चैम्बर से भारी मात्रा में गांजा, प्रतिबंधित टेबलेट और नकदी बरामद की गई। पूछताछ में आरोपी ने नशे के अवैध कारोबार में संलिप्तता स्वीकार की।

बदलता अपराध, बदली पुलिस रणनीति



पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज (ग्रामीण) अमरेश मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशन में चल रहे ऑपरेशन निश्चय के चलते तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
इसी के जवाब में पुलिस इंटेलिजेंस-ड्रिवन ऑपरेशन, माइक्रो-लेवल सर्विलांस और एंड-टू-एंड विवेचना के जरिए लगातार शिकंजा कस रही है।

सबसे बड़ा सवाल: बड़े मगरमच्छ कब पकड़ में आएंगे?

हालांकि इस कार्रवाई ने पुलिस की सक्रियता को साबित किया है, लेकिन तिल्दा-नेवरा शहर में लंबे समय से सक्रिय बड़े नशा माफिया, जुआ-सट्टा और अवैध शराब के सरगना अब भी सवालों के घेरे में हैं।
क्या इन पर किसी का संरक्षण है?
या फिर कानून की नज़र अब भी वहां तक नहीं पहुंच पाई?

कुछ ही दिनों पहले कांग्रेस द्वारा थाना तिल्दा-नेवरा का घेराव किया गया था, जिसमें जुआ-सट्टा, अवैध शराब और नशे के कारण युवा पीढ़ी के भविष्य पर मंडराते खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

चाकूबाज़ी, अपराध और डर का माहौल

23 जनवरी से रायपुर शहर व ग्रामीण क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने से पहले ही चाकूबाज़ी और हिंसक वारदातों में शामिल कई आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।
इसके बावजूद आम नागरिक, विशेषकर नाबालिगों और युवाओं के माता-पिता, आज भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


ऑपरेशन निश्चय ने साफ कर दिया है—पुलिस पीछे हटने वाली नहीं।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि नशे के इस दलदल में छुपे “बड़े मगरमच्छों” पर कार्रवाई कब होती है।

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