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जनसंपर्क विभाग में पारदर्शिता पर सवाल, प्रधानमंत्री से लेकर CBI तक पहुंची शिकायत

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जनसंपर्क विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मचा बवाल, अपर संचालक संजीव तिवारी की उच्चस्तरीय जांच की मांग

रायपुर खोज खबर छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय, सीबीआई निदेशक तथा विभागीय सचिव सहित कई संवैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

प्रदेश प्रधान महासचिव राहुल कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि विभाग में विज्ञापन वितरण, निविदा प्रक्रियाओं, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। संगठन का कहना है कि इन शिकायतों के कारण पत्रकार समुदाय में असंतोष बढ़ा है और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दो दशक की पदस्थापना और फैसलों की समीक्षा की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारी को जांच पूरी होने तक वर्तमान दायित्वों से अलग करने या अन्यत्र स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए। साथ ही पिछले लगभग 20 वर्षों के दौरान उनकी पदस्थापना, स्थानांतरण, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और उनसे जुड़े शासकीय निर्णयों की भी समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी प्रक्रियाएं नियमों और नीतियों के अनुरूप संचालित हुई थीं या नहीं।

SIT, EOW या CBI जांच की मांग

संगठन ने आरोप लगाया है कि जनसंपर्क विभाग में विज्ञापन वितरण, मीडिया प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और निविदा प्रक्रियाओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर लगातार शिकायतें आती रही हैं। इसलिए इन सभी मामलों की जांच विशेष जांच दल (SIT), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) अथवा आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी सक्षम एजेंसियों से कराई जानी चाहिए।

संपत्तियों और आय के स्रोतों की जांच की भी मांग

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि संबंधित अधिकारी और उनके परिवार की चल-अचल संपत्तियों, आय के स्रोतों तथा शासकीय अभिलेखों में प्रस्तुत विवरणों का सत्यापन कराया जाए। यदि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्तियां अर्जित की गई हैं तो उनकी वैधानिकता की भी जांच की जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या पद के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

अभय शाह प्रकरण का भी उल्लेख

ज्ञापन में बुलंद छत्तीसगढ़ समाचार पत्र से जुड़े अभय शाह द्वारा प्रस्तुत परिवाद का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को समान अवसर दिया जाना आवश्यक है। साथ ही अभय शाह और अन्य संबंधित पक्षकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार के दबाव या हस्तक्षेप को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की भी मांग की गई है।

“उद्देश्य दोषी ठहराना नहीं, सच्चाई सामने लाना है”

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना है, ताकि वास्तविक तथ्यों का पता लगाया जा सके और शासन-प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रहे।

संगठन ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो सक्षम न्यायालयों और वैधानिक संस्थाओं के समक्ष विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष सोनू रेलवानी, महासचिव सचिन, सहसचिव सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें रंजना सिंह, संगीता बर्मन, जानकी मरकाम, मयंक श्रीवास्तव, प्रवीण शर्मा, लोकेश हिरवानी, आनंद गुप्ता, परितोष शर्मा तथा राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ संयोजक छत्तीसगढ़ संतोष कुमार यदु सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

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