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फिल्मी के नाम पर फिर बवाल! ‘घूसखोर पंडित’ के बाद अब ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर महासंग्राम

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संभल में सड़कों पर उतरा यादव समाज, थाने में शिकायत… स्क्रीनिंग रोकने का अल्टीमेटम

रायपुर ख़ोज ख़बर छत्तीसगढ संवाददाता संतोष कुमार यदु

रायपुर छत्तीसगढ़ 20 फरवरी   खोज खबर छत्तीसगढ़  विशेष रिपोर्ट) उत्तर प्रदेश संभल फिल्मी दुनिया में एक बार फिर नाम और कहानी को लेकर सामाजिक संग्राम छिड़ गया है। हाल ही में चर्चित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर पंडित समाज के विरोध के बाद अब नई फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ विवादों के केंद्र में आ गई है।

संभल जिले के धनारी थाना क्षेत्र में यादव समाज के लोगों ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फिल्म में दर्शाई गई कहानी और शीर्षक जानबूझकर यादव समाज को निशाना बनाता है और उनकी सामाजिक छवि को ठेस पहुंचाता है।

क्या है विवाद की जड़?

फिल्म में यादव समाज की एक युवती और मुस्लिम युवक के बीच प्रेम संबंध दिखाया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि:

फिल्म का नाम समुदाय विशेष को सीधे तौर पर दर्शाता है।

कहानी से सामाजिक प्रतिष्ठा पर आघात होता है।

इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।


यादव समाज के लोगों ने इसे “सोची-समझी साजिश” बताते हुए तत्काल प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सिनेमा हॉल को चेतावनी

धनारी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने सिनेमा संचालकों को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है—

> “अगर फिल्म की स्क्रीनिंग तुरंत बंद नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।”



बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।


थाने में शिकायत, कानूनी कार्रवाई की मांग

यादव समाज के प्रतिनिधिमंडल ने धनारी पुलिस थाने में फिल्म निर्माता और संबंधित पक्षों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और जानबूझकर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश की गई है।

पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

पहले ‘घूसखोर पंडित’ पर भी मचा था घमासान

गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर भी देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। पंडित समाज ने फिल्म के शीर्षक को आपत्तिजनक बताते हुए इसे समाज विशेष को बदनाम करने की कोशिश बताया था।

अब ‘यादव जी की लव स्टोरी’ विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—
क्या फिल्मों के नाम और कथानक में समुदाय विशेष का उल्लेख नई सामाजिक बहस को जन्म दे रहा है?
या फिर रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बिगड़ रहा है?

समाज बनाम सिनेमा – बढ़ती टकराहट

विशेषज्ञों का मानना है कि

फिल्म निर्माता अक्सर यथार्थवादी या विवादित विषयों को चुनते हैं।

लेकिन समुदाय आधारित शीर्षक संवेदनशीलता का विषय बन जाते हैं।

सोशल मीडिया के दौर में विरोध तेजी से संगठित हो जाता है।


संभल में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन माहौल संवेदनशील बना हुआ है।


-आगे क्या?

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं।
यदि विरोध बढ़ा, तो फिल्म की स्क्रीनिंग पर रोक भी लग सकती है।

फिलहाल एक बात साफ है—
फिल्मी परदे की कहानी अब सड़कों तक पहुंच चुकी है…
और यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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